मेरी कहानी
मन की उड़ान का, मेरी इस नन्ही मुस्कान का..
सपना है आगे बढूँ, अपने इस समाज के लिए कुछ करूँ.
छोटी सी थी जब, पढने चली थी तब..
नाम था स्कूल का सत. मार्क्स, मन में थी नयी आस..
मन लगने लगा, उड़ने लगा..
में पढने लगी, आगे बढ़ने लगी.
नन्ही सी मुस्कान का काम अब आसन था..
नित नयी खोज करना, सुन्दर लिखना, पेंटिंग करना..
पापा ने पढाया, माँ ने सिखाया..
भैया ने मेहनत का मार्ग दिखाया.
आगे बढ़ते हुए, काम करते हुए..
माँ की सोच को अपनाते हुए..
कुछ सीखने का सपना लिए में नृत्यभारती की हुयी..
भरतनाट्यम आया पसंद, सीखना देता था मुझे आनंद..
एक नयी कला व साज़ सीखके, नृत्यांगना बनीं हूँ आज.
मेरे विद्यालय से अच्हा DPS का नाम,जानता था हर बच्चा,
अगले वर्ष DPS में मेने खुद को पाया.
बारवीं का परीक्षा परिणाम आया,
हंसराज कॉलेज में मैने स्थान पाया.
गणित विषय था मुख्य मेरा,
मन ने लगा लिया डांस सोसाइटी में डेरा..
पर क्या हुआ समझ न पाई मन में अचानक नयी राह आई..
अब में गणित का गणित नहीं जानती,
केवल Media Communication को पहचानती..
तभी बचपन का संकल्प याद आया,
PR को अपना विषय बनाया
अब कुछ अवश्य कर दिखाउंगी,
अच्हे समाज का सपना पूरा कर पाऊँगी.
Swati Sharma
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